Jadui Katora – जादुई कटोरा – Magical Bowl – हिंदी कहानिया

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Hello Kids कैसे हैं आप सब ? आपने हमारी पिछली कहानी कंजूस कन्नालाल की पढ़ी थी | इसी तरह आज हमलोग एक और कहानी पढ़ेंगे जिसका नाम है Jadui Katora – जादुई कटोरा – Magical Bowl. Bedtime Moral Stories Animated Fairy Tales. चलिए इस कहानी को पूरा पढ़ते है |

कंजूस कन्नालाल – हिंदी नैतिक कहानियां बच्चो के लिए

Jadui Katora – जादुई कटोरा

एक गांव में जोगी और जीविका नाम के एक बूढ़े दम्पति रहते थे | उनका एकलौता बेटा उन्हें छोड़कर चला गया इसलिए वे उस गांव में भीख मांगकर गुजारा करते थे | वे घर घर जाते और ‘ भूख लगी है भाई , भूख लगी है माई , एक मुठी भर खाना देना माई ‘ कहकर भीख मांगते थे | उस गांव में कुछ लोग उन्हें रोज खाना देते थे , जिससे वे अपना पेट भरते थे |

एक दिन रात को जब वे अपनी झोपड़ी में खाना खा रहे थे तभी बाहर एक कुत्ते की रोने की आवाज सुनाई दी | बाहर जाकर देखा तो एक कुतिया अपने चार बच्चों के साथ वहां रो रही थी |

उसे देखकर जीविता – बेचारी ! माँ ने कुछ खाया नहीं तो बच्चों को दूध नहीं दे पा रही है | उसे कुछ खिलाते है जी |

जोगी – हाँ , बेचारी ! उसे तुरंत खाने को दो |

इस तरह अपने लिए मांगे खाना उसे दे दिया | कुतिया खाना खाकर वहां से अपने बच्चो के साथ चली गयी |

तुरंत एक सोने का कटोरा उनके सामने प्रगट हुआ | उसे देखकर वे दोनों चकित रह गए |

इतने में आकाशवाणी हुई – “अब से तुम दोनों को कोई भीख मांगने की जरुरत नहीं है | इस सोने के कटोरे से जो भी खाने की वस्तु मांगोगे , वो प्रकट हो जायेगा | लेकिन पैसे या और कोई वस्तु प्रकट नहीं होगा | अब से इसका प्रयोग कर अपने शेष जीवन आराम से बिताओ |

दोनों ने आकाशवाणी को प्रणाम किया | उस दिन से इन दोनों ने कटोरे से अच्छे – अच्छे व्यंजन मंगवाकर खाकर आराम से रहने लगे | साथ – साथ और भिखारियों को भी खाना खिलाने लगे |

Bedtime Moral Stories Animated Fairy Tales In Hindi

एक दिन उनका बेटा सन्तु कर्ज में डूबा घर लौटा | बेटे पर तरस खाकर उस कटोरे से खाने को प्रकट कर उन दोनों ने उसे भोजन कराया |

इस तरह कई दिन बिताने के बाद एक दिन सन्तु के मन में लालच जगा | उसने मन ही मन सोचा – इस चमत्कारी कटोरे को लेकर बहुत पैसे कमाने होंगे |

कुछ दिनों बाद उसने एक होटल खोला | माँ – बाप की अनुमति के बिना उस कटोरे को होटल की रसोई में रखकर ग्राहकों की इक्षानुसार व्यंजनों को प्रकट कर उससे पैसे कमाने लगा |

वह कटोरे के पास जाकर – ” चार प्लेट पनीर बटर मसाला , दस रोटी ” ऐसा कहता था | कटोरे से निकले भोजन को ग्राहकों को देता था | उस कटोरे से प्रकट हुए व्यंजन स्वादिष्ट होने के कारण लोग बड़ी मात्रा में आने लगे |

हर रोज कटोरे के पास आकर – ” दो चिकेन बिरयानी , चार मटन पोलाव ” कहता था | उसके प्रकट होते ही वह ग्राहकों को परोसता था | इस तरह उन्हें बेचकर अच्छे पैसे कमाने लगा |

माँ – बाप से झूठ बोला की वह कटोरा चोर ले गया | उन्हें खाना भी भीख की तरह देने लगा |

यु ही चल रहा था की एक दिन सन्तु सोचने लगा – ये कटोरा खाना तो देता है पर इसे परोसते – परोसते हाथ थक जाते है | ये कटोरे तो पैसे दे नहीं रहा | इसलिए इसे बेचकर जो पैसे मिले , उससे आराम से जी सकते है |

उसने तुरंत महाराज के पास जाकर इस कटोरे के बारे में सबकुछ बताया | उसने कहा की यह कटोरा एक लाख अशर्फियों के बदले में देगा | उसने महाराज से कहाँ की आप चाहे तो उसे जाँच ले |

महाराज ने कहा – मुझे दूध-पेड़ा चाहिए | तुरंत उस कटोरे में से गोबर निकला | उसे देखका दरबार में मौजूद सभी लोग हँसे |

महाराज गुस्से से आग – बबूला हो गए और बोले – तुम्हारी ये हिम्मत ! मुझसे मजाक करते हो | सिपाहियों इसे तुरंत कारागार में बंद कर दो | इसे अब जिंदगी भर यही रहना पड़ेगा |

सिपाही उसे कारागार ले गए और वह कटोरा फिर से जोगी के घर में प्रकट हो गया |

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इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

तो बच्चो इस कहानी (Jadui Katora) से हमें यही शिक्षा मिलती है की लालच बुरी बला है | और जो माँ बाप की ईज्जत नहीं कर सकते , वो जिंदगी में कभी कामयाब नहीं हो सकते |

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