कंजूस कन्नालाल – Panchantantra Moral Stories In Hindi

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कंजूस कन्नालाल Hindi Kahaniya | Hindi Stories For Kids | Panchantantra Moral Stories | Fairy Tales

एक गाँव में कन्नालाल नाम का एक कंजूस आदमी रहता था | सारे गाँव वाले उसे ‘कंजूस कन्नालाल‘ के नाम से बुलाते थे | कन्नालाल ऐसा एक भी काम नहीं करते थे जिससे उनका लाभ न हो और वो एक पैसा भी खर्चा नहीं करते थे |

कंजूस कन्नालाल

एक दिन उसकी पत्नी सीता ने कहा – ‘अजी ! सुनते हो – टूथपेस्ट (Toothpaste) खत्म हुए दो महीने हो गए है कितना भी निचोड़ो उसमे से कुछ भी नहीं निकल रहा है | ‘

और उनकी बेटी लीला भी बोली – ‘ टूथपेस्ट खरीदे हुए भी दो साल हो गए है और वह पूरी तरह से घिस गया है | नया खरीद दो ना !

दोनों की ऐसी बातें सुनकर कन्नालाल बोला – ‘ मांगे देखो इनकी ! आदिमानव ने कभी ब्रश और पेस्ट का इस्तेमाल किया था ? जाओ जाकर नीम के डंडे से मुँह साफ कर लो | सेहत के लिए भी अच्छा है | पैसों को ऐसे ही खर्चा नहीं किया जाता है , समझे !

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कंजूस कन्नालाल की कहानी !

एक दिन उनकी पत्नी सीता का भाई सुक्कू उनके घर आया | उसे देखकर कन्नालाल बोला – आईये साले साहब आईये ! आज मटन की सब्जी के साथ खाना खाएंगे |

ये बातें सुनकर सुक्कू बोला – क्या मैं ये बातें सही सुन रहा हूँ ? क्योकि मैं जब भी आपके घर आता हु तो तुम मुझे खाना खाने के वक्त घर से निकाल ही देते हो |

दीदी तुम्हारा पति बहुत बदल गया है , वाह ! वाह ! ऐसी बातें सुनकर मुझे कितना आनंद प्राप्त हो रहा है | जल्दी – जल्दी खाना परोस दो | कही उनका मन न बदल जाए !

फिर खाने पर बैठकर सुक्कू ने कहा – अरे ! ये तो खाली चपाती है , मटन का सब्जी कहाँ है ?

” कुछ दूर पर एक बकरी बंधी थी जो की घास चर रही थी “

फिर कन्नालाल ने कहा – साले साहब ! वहां एक बकरी दिख रहा है तुम्हे ? अच्छी तरह से उस बकरी को देखो और सोचो की उस बकरी की सब्जी पकी है और सुखी रोटी खा लो |

बकरी का फोटो

लगेगा एकदम मटन की कढ़ी के साथ खा रहे हो और बड़ा स्वाद आएगा |अरे ! 300 रूपये में मटन खरीदने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी | खालो ! खालो !

फिर ऐसी बातें सुनकर सुक्कू बोला – छी ! छी ! जीजाजी , इतना कंजूस कैसे बन गए हो आप ! इस जन्म में तो नहीं बदलोगे आप | अगर फिर से मैं आपके घर आऊँ न तो आप चप्पल से मारना | ऐसी बातें वह सुनाकर बहुत गुस्से में उनके घर से चला गया |

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Panchantantra Moral Stories In Hindi

एक दिन एक युवक कन्नालाल के घर आ पंहुचा | उस युवक ने कन्नालाल से कहा – सुना है कन्नालाल जी के घर में कोई कमरा खाली है | आप ही कन्नालाल जी है क्या ? मेरा नाम सुशांत है |

तब कन्नालाल बोला – हाँ ! हाँ ! हाँ ! मैं ही कन्नालाल हु | मेरे घर में कमरा तो खाली है लेकिन महीने का उसका किराया 500 रुपया लगेगा |साथ ही करेंट और पानी का अलग पैसा लगेगा | और हाँ दिन में करेंट केवल दो घंटे ही चलाना है और पानी दिन में सिर्फ एक बाल्टी ही मिलेगा |

” वैसे तुम करते क्या हो बेटा ? ” कन्नालाल ने सुशांत से पूछा |

सुशांत बोला – जी मैं अखिल भारतीय कंजूस संघ का अध्यक्ष हूँ |अभी जरुरत है तो मैं आपसे बातें कर रहा हु वरना मैं बिना पैसो के मुँह खोल के बात भी नहीं करता |

फिर कन्नालाल बोला – अरे वाह ! क्या खूब मिले हो तुम | वैसे तुम्हारा सामान – ओमान कहाँ है ?

सुशांत बोला – समान ! मैं तो एक ही जोड़ा पहनता हूँ | खरीदे 10 साल हुआ |अब कपडे ज्यादा होंगे तो उन्हें धोने के लिए साबुन का खर्चा , इस्त्री में कोयले का अलग खर्चा | इसलिए मैं कपडे ही नहीं खरीदता हूँ |

रात को कपडे को खोल देता हूँ और सोते वक्त उन्हें तकिये की तरह इस्तेमाल कर लेता हूँ और सुबह कपडे ऐसे लगते है , जैसे इस्त्री किये गए हो |

ऐसी आश्चर्य भरी बातें सुनकर कन्नालाल पूछा – कपडे के बगैर रात में सोते कैसे हो ? ठण्ड नहीं लगती |

फिर सुशांत बोला – अरे मेरे सरे रहस्य जानना चाहते हो | मैं किसी को कुछ नहीं बताता , पर आपको बताना पड़ रहा है | रात को मैं Newspaper ओढ़ कर सो जाता हूँ , समझ गए |

सुशांत की ऐसी बातें सुनकर कन्नालाल भचौंक कर रह गया और सुशांत से बहुत कुछ सिखने का उसने निर्णय कर लिया |

kanjoos kannalal aur uski bibi

फिर रात को उसने Newspaper पहनकर अपनी बीबी से पूछा – कैसा लग रहा हूँ मैं ? अच्छा लग रहा हूँ न मैं | तुम भी पेपर पहनोगी क्या ?

फिर सीता बोली – छी ! छी ! ये आप क्या कर रहे हो ? अगर वह पेपर फट गया तो क्या होगा ? दिन पर दिन आपका पागलपन तो बढ़ता ही जा रहा है |

दूसरे दिन सुशांत अपने घर के सामने झुककर कुछ उठा रहा था और उसे एक डब्बे में डाल रहा था | कन्नालाल बहुत आशा भरी आवाज में उससे पूछा – बेटा ! क्या कर रहे हो ? क्या उठा रहे हो तुम |

फिर सुशांत इशारा से कन्नालाल से बोला – पैसा मिलेगा तभी मैं बात करूँगा वरना नहीं | फिर कन्नालाल बोला – ओह ! मैं तो भूल ही गया था तुम तो बिना पैसे के बात नहीं न करते हो ये लो 10 पैसे और बताओ ऐसा क्यों कर रहे हो ?

पैसे लेकर सुशांत बोला 10 पैसो में मैं 10 बात ही बोलूंगा और ऐसा कहकर वह अपनी सारी बातें उसे बताने लगा |

  • मैं न फेके हुए माचिस की तिल्लियों को इक्कठा कर रहा हूँ और इन माचिस की तिल्लियों से दाल बनाऊंगा | इससे खर्चा बच जाता है और स्वादिष्ट भी बन जाता है | साथ में पेट भी भर जाता है |
  • मेरे पास तो इसके अलावे भी कई सारे उपाय है मैं सब्जिया नहीं खरीदता हूँ | मंडी में जो सब्जिया फेंक देते है , उन्हें मैं लाता हूँ |
  • Bucket बाल्टी के अंदर खड़े होकर मैं नहा लेता हूँ और उसी पानी को फिर से इस्तेमाल करता हूँ |
  • पता कर लेता हूँ कौन – सी मंदिर में कौन – सा प्रसाद बन रहा है और उसे खाकर पेट भर लेता हूँ |
  • कभी कभी A.C. की जरुरत पड़ ही जाती है तो ATM Counter में बिना काम का कुछ देर बैठ जाता हूँ और फिर आ जाता हूँ |
  • क्या आपको पता है की रात को सोने से कितना नुकसान होता है ? इसलिए रात को मैं सोता ही नहीं हूँ | वो रात को बस आते है न , वहां मैं कपडे से मुँह ढंककर चाय बेच लेता हूँ |

इतना सब बातें बता कर वह कन्नालाल से बोला – पता नहीं क्यों आपको मैं सारी बातें बता रहा हु | फिर आपको कभी कोई बात नहीं बताऊंगा , ठीक है !

फिर कन्नालाल बोला – छोटे उम्र में ही तुम कितने कंजूस बन गए हो ? इसलिए तुम्हे कंजूस संघ का President बनाया है | तुम्हे देखकर पता चला की आज तक मैंने कितने पैसे बेकार में खर्चा किया है | आगे से तुम्हारे सारे उपायों पर मैं भी चलूँगा बेटा |

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* पंचतन्त्र की कहानियाँ –

उस दिन से मंडी में फेंके गए सब्जियों को कन्नालाल चोरी छिपे उठा लाता था , बाल्टी में खड़े होकर नहाता था , मंदिर मंदिर घूमकर प्रसाद ले लेता था और रात को जहाँ बस रुकते थे , वहाँ जाकर चाय बेचता था |

एक दिन उसकी बीबी ने कहा – ये सब क्या कर रहे हो जी | पता है ! लोग हम पर हँस रहे है | उस लड़के के आने के बाद तो आपने कंजूसी की हद ही पार कर दी है | ऐसा ही रहा तो मेरी बेटी की शादी कैसे होगी ?

फिर बीबी से कन्नालाल ने कहा – उस लड़के के आने के बाद मैंने बहुत कुछ सीखा है | उसे कुछ मत कहना ! मेरा गुरु जैसा है वो ! मैंने निर्णय कर लिया है की मेरी बेटी की शादी तो उसी से होगी | मेरी खुशकिश्मती होगी अगर वो मेरा दामाद बन जाये |

दूसरे दिन सुशांत को उसने एक मोहर देकर कहा – बेटा तुम्हारे पद्धतिया वगैरह बहुत पसंद आये और तुम्हारी ये कंजूसी तो मुझे बहुत ही पसंद आयी |अगर तुम बुरा न मानो तो क्या तुम मेरी बेटी से शादी करोगे ? अगर तुम मेरे दामाद बन गए तो जिंदगी भर पूरा परिवार कंजूसी के साथ जी लेंगे | क्या कहते हो ?

सुशांत पूछा – आपकी बेटी से शादी करने से मेरा क्या फायदा है ? बड़े घर में शादी करूँगा तो मुझे बहुत सारा दहेज और धन दौलत मिलेंगे |

कन्नालाल बोला – बेटा ! बेटा ! बेटा ! ऐसी बाते मत करो | तुम मेरे दामाद बनोगे तो मेरे बेटे जैसे ही होंगे न | मेरा पूरा सम्पति तो तुम्हारा ही होगा न ! जरा सोच के तो देखो |

इतने में उनके घर के सामने एक कार आकर रुकी | कार में से एक आदमी निकला और उनकी तरफ चल के आया | उस आदमी ने कन्नालाल से कहा – क्यों कन्ना ! कैसे हो ? मुझे पहचाना , मैं हु शंकर लाल तेरा Classmate. मैंने धंधे में करोड़ो रूपये कमाए और शहर में बस गया | मेरा तो एक ही बेटा है और उसने कहा की वो तेरी बेटी को पसंद करता है | मुझे कोई दहेज़ नहीं चाहिए क्या तू इस शादी से राजी है ?

उसी वक्त कन्नालाल ने कहा – दोस्त ! तुझे मिले कितने साल हो गए न | तेरे बारे में , तेरे धंधे और सम्पति के बारे गांव वाले बात करते रहते है तो मैंने सुना है | तेरा जैसा कोई रिश्ता मना करता है क्या ? मैं तो खुश हूँ |

फिर शंकर लाल बोला – देखा सुशांत ! यही इसका असलियत है | तूने कहा था न की इसमें बदलाव लाएगा | देख क्या हुआ ? कन्नालाल यही मेरा बेटा है सुशांत | तेरी बेटी और इसमें प्यार हो गया है | पर एक अमीर घराने के बेटे की तरह तुझमे बदलाव लाने के लिए तेरे ही घर में किरायेदार बनकर आया था |

फिर शंकर लाल अपने बेटे सुशांत से बोला – सुशांत ! तू ये शर्त हार चूका है | चुपचाप चलो और जिस लड़की से मैं कहता हूँ , उससे शादी कर लो जिंदगी भर कोशिश करेगा , फिर भी इस कंजूस कन्नालाल को बदल नहीं पायेगा |

ऐसी बातें सुनकर सुशांत बोला – पिताजी ! इनमे बदलाव लाने में मैं उनकी तरह बदल गया | मेरी कंजूसी देखकर मुझसे बेटी का शादी करवाने आया था | वरना मैं तो इनको बिलकुल नहीं बदल पाया | ये शर्त आपने ही जीता है पिताजी | मीना मुझे माफ़ करना मैं तुमसे शादी नहीं कर पाऊँगा |

इनकी बातें सुनकर कन्नालाल में बदलाव आया और उसने कहा बेटा सच में तुम इतने बड़े घराने के बेटे हो और मुझमे बदलाव लेन के लिए मेरे घर के उस टूटे फूटे कमरे में इतने दिन रहे | पता है मेरे कंजूसी से मैंने अपने परिवार को बहुत सताया है | मुझे अब समझ में आया की मैंने कितनी गलतिया की है ?

मेरे वजह से मेरी बेटी की जिंदगी खराब नहीं होनी चाहिए इसलिए मुझपे दया करो और मेरी बेटी से शादी कर लो | आगे से इतनी नीची हरकते मैं कभी नहीं करूँगा | इसके बाद सुशांत और मीना की शादी बहुत ही धूम – धाम से हुई |

अब रही बात कंजूस कन्नालाल की तो वह बहुत सुधर गया और उसने काफी दान धर्म किये और बहुत नाम कमाया |

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इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

तो बच्चों इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है की पैसो को सोच समझ के खर्चा करना अलग बात है और कंजूसी अलग बात है | जिंदगी में सिर्फ पैसो को अहमियत देकर कोई सुख शांति का भोग न करके जीना भी कोई जीना होता है !

अच्छी लगी हमारी कंजूस कन्नालाल की कहानी | यदि यह कहानी आपको पसंद आयी तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर जरूर करे |

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